आदिवासियों पर हुए गोली चालन की घटना को लेकर दिग्विजय,सिंधिया ने अपनी ही सरकार पर साधा निशाना

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भोपाल। सरकार की डिनर पॉलिटिक्स से दूर रहे पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अब अपनी ही सरकार को घेरा है। उन्होंने बुरहानपुर में वनवासियों पर गोली चलाने की कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों पर कार्यवाही की मांग की है।  दिग्विजय ने कहा जो घटना हुई है वह मौजूदा  शासन की घोषित नीति के विरुद्ध है व निंदनीय है।  इसी मामले में पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया व कांग्रेस विधायक हीरा अलावा ने घटना की निंदा की है। खास बात ,यह कि इस मामले में जिला कलेक्टर ने मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश दिए लेकिन जांच के सभी बिंदु प्रशासनिक अमले पर हुए पथराव  व गोली चालन के  लिए पैदा हुई  परिस्थितियों को लेकर तय किए गए।

ज्ञात हो,कि बुरहानपुर जिले के नेपानगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम बदनापुर (सीवल) में 9 जेसीबी मशीन लेकर अतिक्रमित वनभूमि पर बीजरोपण के लिए गड्ढे खोदने पहुंचे वन ,राजस्व व पुलिस अमले पर आदिवासियों ने पथराव कर दिया था। इसके जवाब में सरकारी अमले ने हवाई फायर किए। इससे बंदूक की गोलियों के छर्रे लगने से कुछ आदिवासी घायल हो गए थे।

इस घटना को लेकर शनिवार को अचानक सियासत गर्मा गई। पूर्व मुख्यंत्री दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा,कि कॉंग्रेस सरकार की प्राथमिकता आदिवासी विकास और उनके अधिकारों का संरक्षण है। जो घटना हुई है वह मौजूदा  शासन की घोषित नीति के विरुद्ध है और निंदनीय है। शासन को तत्काल दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करना चाहिए। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी ट्वीट कर घटना की निंदा करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले की पारदर्शी व निष्पक्ष रूप से जांच कर दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। इधर, जयस संगठन छोड़ कांग्रेस से विधायक बने हीरालाल अलावा ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिख इस मामले पर अपना विरोध जताया।

लीपापोती वाली जांच के आदेश

उक्त घटनाक्रम को लेकर सियासत तेज होने पर जिला कलेक्टर ने घटना की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश जारी किए,लेकि न जांच के सभी बिंदुओं गोलीचालन की वजह को पुष्ट करने वाले हैं। मसलन,  अतिक्रमण हटाने के दौरान पथराव व गोली चालन  किन परिस्थितियों में हुआ और क्या गोली चलाने के पर्याप्त कारण थे। यदि हां तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के क्या उपाय हैं। जांच रिपोर्ट एक माह में सौंपी जानी है।

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