पत्रकारिता विवि में मनोनयन के अधिकार अपने हाथ में लेने की तैयारी में सरकार

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भोपाल। प्रदेश सरकार माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद में बतौर सदस्य किसी भी दूसरे विश्वविद्यालय के कुलपति चुनने के अधिकार भी अपने हाथ में लेने जा रही हैं। वर्तमान में यह अधिकार कुलाधिपति के नाते राज्यपाल के पास है। इसके लिए विधानसभा में मंगलवारक को एक संशोधन विधेयक पेश किया गया है। इसके पारित होने पर विश्वविद्यालय में दो सांसदों के  मनोनयन का अधिकार भी सरकार के पास होगा। वर्तमान में यह मनोनयन लोकसभा अध्यक्ष व राज्य सभा के सभापति द्वारा किया जाता है।

मंगलवार को सदन में मप्र माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विवि संशोधित पेश किया। सूत्रों के अनुसार, संशोधित अधिनियम में  दूसरे राज्यों के संचार प्रतिनिधियों के मनोनयन में संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा मनोनयन की शर्त को हटाकर मप्र के मुख्यमंत्री को अधिकार दिए जाने वाले हैं। इन संशोधन के साथ विधेयक के पारित होते ही माखनलाल विवि में कुलपति और अन्य मनोनीत सदस्यों के नियमों में परिवर्तन हो जाएंगे।

घरेलू विवाद में होगी समझौते की राह आसान

विधानसभा के पटल पर रखे गए दंड प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक में छह संशोधन किए जा रहे हैं। इन संशोधनों के बाद घरेलू विवाद में एफ आईआर दर्ज होने के बाद भी समझौता कर पाने, कोर्ट आपसी सहमति से प्रकरण समाप्त कर सकेगा, वीडियो कॉन्फ्रें सिंग से  गवाही कराई जाएगीऔर भरण पोषण के मामले माता पिता को नहीं भटकना होगा। इसी तरह विधानसभा में मध्यप्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक 2019 को भी पटल पर रखा गया, जिसमें इस निधि में हाईकोर्ट व अधीनस्थ न्यायालयों में फ ाइल होने वाले मामलों में लगने वाले स्टाम्प का मूल्य बढ़ाने का प्रावधान है। हाईकोर्ट में अब 50 से 100 रुपए तो अधीनस्थ कोर्ट में 20 से 40 रुपए मूल्य के स्टाम्प लिए जाने की तैयारी है। इनके अलावा मध्यप्रदेश कृषि उपज मंडी (संशोधन) विधयेक और मध्यप्रदेश माध्यस्थम अधिकरण (संशोधन) विधेयक भी विधानसभा के पटल पर रखे गए हैं।

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