केंद्र की देन मप्र में पेट्रोल,डीजल के दाम बढऩा: कमलनाथ

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छिंदवाड़ा। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने केंद्र सरकार के बजट को मध्य प्रदेश के साथ अन्याय बताया है। इसका सबूत यह है कि केंद्र सरकार ने बजट में मप्र को 2700 करोड़ रुपए कम दिए हैं। मप्र की विभिन्न योजनाओं में राशि कम की गई है। यह प्रदेश के साथ अन्याय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बात करते हैं कि हर प्रदेश के साथ न्याय होगा लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने अपने पहले बजट में ही अन्याय का सबूत दे दिया है।

शनिवार को जिले के दौरे पर आए मुख्यमंत्री मीडिया से चचाज़् कर रहे थे। प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढऩे के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केंद्र सरकार की ही देन है। छिंदवाड़ा को स्माटज़् सिटी बनाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी स्माटज़् सिटी की घोषणा को दो-तीन महीने ही हुए हैं, जबकि स्माटज़् सिटी बनने में तीन से चार वषज़् का समय लगेगा।

श्री नाथ  दोपहर करीब दो बजे छिंदवाड़ा आए थे। वे शिकारपुर स्थित अपने निवास पर पहुंचे और जिलेभर से आए कायज़्कताओं से मिले। वे कुछ अन्य कायज़्क्रमों में भी शामिल हुए। मुख्यमंत्री रविवार को भी छिंदवाड़ा में ही रहेंगे एवं विभिन्न कायज़्क्रमों में शामिल होकर भोपाल रवाना होंगे।

गौरतलब है,कि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को पेश बजट में पेट्रोल और डीजल पर 2-2 रुपए सेस और विशेष एक्साइज ड्यूटी लगाने की घोषणा की। इससे केंद्र स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें करीब ढाई रुपए बढ़ रही थीं। कमलनाथ सरकार भी इस मामले में पीछे  नहीं रही और उसने प्रति लीटर दो-दो रुपए का इजाफा कर डाला। इससे प्रदेश में पेट्रोल  व डीजल के दाम में करीब पांच रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गए हंै।

नुकसान की भरपाई करने की कवायद

केंद्र सरकार से मिलने वाले केंद्रीय करों के हिस्से में 2677 करोड़ों रुपए की कटौती होने के बाद राज्य सरकार इसकी भरपाई में जुट गई है। पेट्रोल,डीजल पर 2 रुपए अतिरिक्त शुल्क बढ़ाने से राज्य सरकार को सालाना करीब 700 करोड़ रुपए की आय होगी। दरअसल,केंद्र सरकार द्वारा टैक्स बढ़ाए जाने का फ ायदा राज्य सरकार को नहीं हो रहा था। सेस और स्पेशल एक्साइज ड्यूटी से जो राजस्व केंद्र सरकार वसूलती है, उसे राज्य सरकारों को नहीं देती। यह पहली बार नहीं है। 2018 में भी केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल से 8 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी कम कर 8 रुपए प्रति लीटर रोड सेस लगा दिया था। एक बार फिर सेस बढ़ाए जाने और एक्साइज ड्यूटी में कमी किए जाने से मप्र सरकार को सालाना एक हजार करोड़ रुपए का नुकसान संभावित है। दरअसल, एक्साइज ड्यूटी केंद्रीय करों में शामिल है औेर इसका 42 फ ीसदी हिस्सा राज्य सरकारों को देना होता है।

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