नेबर फर्स्ट का संदेश देने पीएम मोदी दूसरे कार्यकाल में सबसे पहले मालदीव और श्रीलंका की यात्रा करेंगे

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दूसरी बार देश की सत्ता संभालने के बाद पहली विदेश यात्रा पर 8 जून को मालदीव जा रहे हैं। पीएम की इस यात्रा को भारत के पड़ोसी देशों के महत्व और ‘पड़ोसी पहले’ (नेबरहुड फर्स्ट) की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। पीएम मोदी मालदीव की संसद को भी संबोधित करेंगे, जिस पर भारत के सभी पड़ोसी देशों की नजरें होंगी। खास बात यह है कि पिछले आठ वर्षों में पहली बार कोई भारतीय पीएम द्विपक्षीय वार्ता के लिए मालदीव जा रहे हैं। हालांकि PM मोदी इससे पहले नवंबर 2018 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद सालेह के शपथ ग्रहण में भी पहुंचे थे।

पीएम मोदी 8-9 जून को दो दिवसीय मालदीव और श्रीलंका के दौरे पर रहेंगे। पीएम मोदी के दूसरे कार्यकाल में मालदीव की पहली विदेश यात्रा भारत के साथ उसके मजबूत संबंधों को दर्शाती है वहीं, ईस्टर हमले के बाद श्रीलंका जाना भी पड़ोसी प्रथम की नीति के लिहाज से अहम है।

वास्तव में 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की विदेश नीति और कई देशों के साथ संबंध नई ऊंचाई पर पहुंचे हैं। पिछला पांच साल भारत की विदेश नीति के हिसाब से मील का पत्थर साबित हुआ है। कई देशों की यात्रा के साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों की संसद को भी संबोधित किया है। दरअसल, भारत के प्रधानमंत्री को दुनियाभर के देशों द्वारा अपने निर्वाचित सांसदों या जनप्रतिनिधियों को संबोधित करने के लिए आमंत्रित करना विश्व में भारत के बढ़ते प्रभाव को दिखाता है।

PM मोदी को सम्मानित करेगा मालदीव

दूसरे कार्यकाल में मालदीव की पहली यात्रा पड़ोसी देशों में भारत की महत्ता और पीएम मोदी की महत्वपूर्ण स्थिति को दर्शाता है। पीएम मालदीव की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद नशीद संग बैठक करेंगे। इस दौरान मालदीव पीएम मोदी को राष्ट्रपति ऑफिस में ऑर्डर ऑफ निशानीजुद्दीन से सम्मानित करेगा।

भारत देगा मदद, रक्षा संबंधों को मिलेगी मजबूती

पीएम मोदी की यात्रा के दौरान मालदीव के विकास और उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इन समझौतों में मालदीव के विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देना, जल परियोजनाओं को कर्ज मुहैया कराना जैसे कई अहम समझौते शामिल हैं। पीएम मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति संयुक्त रूप से दो रक्षा संबंधी परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे। इसमें तटीय निगरानी रेडार सिस्टम और मालदीव के सुरक्षा बलों के लिए संयुक्त अभ्यास केंद्र का उद्घाटन शामिल है।

पीएम मोदी की यात्रा में ‘SAGAR’

पीएम मोदी की इस यात्रा से भारत की SAGAR (सिक्यॉरिटी ऐंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन) डॉक्ट्रीन का पता चलता है। इस फैसले से साफ है कि मालदीव भारत के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता वाला पड़ोसी बना रहेगा। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में विदेश नीति में मालदीव अहम रहेगा।

पहले कार्यकाल में 10 देशों की संसद को किया संबोधित

पीएम ने 16 जून 2014 को भूटान की संसद के संयुक्त सत्र और 3 अगस्त 2014 को नेपाल की संसद को संबोधित किया था। 18 नवंबर 2014 को पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की संसद को संबोधित किया था। 19 नवंबर 2014 को पीएम ने फिजी की संसद को संबोधित किया था। 12 मार्च 2015 को प्रधानमंत्री ने मॉरीशस की नैशनल असेंबली को संबोधित किया था। 13 मार्च 2015 को पीएम मोदी ने श्रीलंका की संसद को संबोधित किया। 17 मई 2015 को पीएम मोदी ने मंगोलिया की संसद को संबोधित किया। 25 दिसंबर 2015 को मोदी ने अफगानिस्तान की पार्लियामेंट को संबोधित किया। 10 जून 2016 को पीएम मोदी ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया था। 24 जुलाई 2018 को पीएम मोदी ने युगांडा की संसद को संबोधित किया था।

आतंकी हमले के बाद पीएम का श्रीलंका दौरा

पीएम मोदी 9 जून को श्रीलंका पहुंचेंगे। PM का यह दौरा काफी महत्वपूर्ण है। दरअसल, ईस्टर आतंकी हमले के बाद इससे श्रीलंका के लोगों के प्रति भारतीयों की एकजुटता की भावना भी झलकती है। गौर करने वाली बात यह है कि पीएम मोदी इस भीषण आतंकी हमले के बाद श्रीलंका जाने वाले दुनिया के किसी देश के पहले पीएम (या राष्ट्रपति) हैं। पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत और श्रीलंका के रिश्ते बुलंदी पर पहुंचे हैं। दोनों देशों में सुरक्षा सहयोग, आपसी कारोबार हो और सांस्कृतिक संबंध बेहतर हुए हैं।

मार्च में कन्याकुमारी में भाषण देते समय पीएम ने श्रीलंका के साथ मजबूत संबंधों की सराहना की थी।’ हालांकि यह पीएम मोदी का पहला श्रीलंका दौरा नहीं है। वह पहले भी दो बार इस पड़ोसी देश का दौरा कर चुके हैं। मार्च 2015 में तीन देशों की यात्रा के दौरान पीएम मोदी श्रीलंका गए थे और उन्होंने संसद को भी संबोधित किया था। उस समय वह महाबोधि सोसायटी और जाफना भी गए थे।

इसके बाद मई 2017 में श्रीलंका जाकर वह वैशाख डे समारोह में शामिल हुए। पीएम कई बौद्ध आध्यात्मिक गुरुओं और स्कॉलर्स से भी मिले। यात्रा के दौरान पीएम ने भारत के सहयोग से बने एक अस्पताल का भी उद्घाटन किया था। श्रीलंका में तमिल समुदाय के साथ उन्होंने विस्तृत चर्चा की थी।

पीएम मोदी के कार्यकाल में ही भारत सरकार ने 35 करोड़ डॉलर की लागत से पहले चरण में बने घरों को सौंपा था, जिसका सबसे ज्यादा फायदा तमिलों को हुआ जो चाय के बागानों के आसपास रहते हैं। पीएम कहते रहे हैं कि हम (भारत) एक शांतिपूर्ण, सुरक्षित और खुशहाल श्रीलंका देखना चाहते हैं जहां विकास और उन्नति की सभी की उम्मीदें पूरी हों।

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